जानिए क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका ) What is National Security Act In Hindi

National Security Act In Hindi -: क्या आप जानते है की NSA क्या है – NSA, पिछले दिनों आपने रासुका National Security Act के बारें में जरूर सुना होगा रासुका का अभिप्राय राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून से है जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम – 1980, National Security Act ( NSA )  के नाम से भी जाना जाता है, तो आइये जानते है रासुका – राष्ट्रीय सुरक्षा कानून आखिर क्या है, और राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून किन परिस्थितयों में लागू किया जाता है और इसके प्रावधान क्या है और तथा यह कानून आखिर कितना कारगर है, आइये जानते है National Security Act In Hindi.

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए वर्ष 1980 में बनाया गया था जो आवश्यकता पढने पर केंद्र और राज्य सरकार को गिरफ्तारी का आदेश देता है.

पिछले कुछ दिनों में आपने देखा होगा, की भारत सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के संकट से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया था, जिसके बाद स्थितियाँ काफी हद तक, कण्ट्रोल में थी. लेकिन अचानक दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित मरकजों से बड़ी संख्या में विदेशी जमातियों को मिलने से हडकंप मच गया था जिसके बाद स्थितियाँ काफी बिगड़ गयी.

इसी के बाद कुछ लोगो द्वारा तथा जमातियों द्वारा इन कोरोना वायरस की इन विपरीत परिस्थितयों में उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद में नर्सो से अभद्रता और मध्य प्रदेश के इंदौर में जांच के लिए गए मेडिकल कर्मियों पर पथराव करने वाले लोगों पर सरकार द्वारा NSA रासुका लगाया गया. जिनमे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका ) के तहत कार्यवाही की गयी है.  तो आइये जानते है की आखिर क्या है, राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट NSA National Security ACT In Hindi.

क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या National Security Act In Hindi. -: 

दोस्तों, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम – 1980, देश की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार और राज्य राज्य सरकारों को अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए बनाया गया कानून है | रासुका ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है जिससे सरकार / प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और क़ानून में व्यवस्था के लिए खतरा महसूस हो.

इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है की यदि सरकार को लगता है की कोई व्यक्ति उसे देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों को करने से रोक रहा है या राष्ट्रहित में उठाये गए कदमों को सुचारू रूप से चलाने में सरकार के कार्यों या प्रयासों में बाधा बन रहा है तो वह उसे तुरंत गिरफ्तार करने के आदेश दे सकती है.  साथ ही अगर उसे लगे की वह व्यक्ति आवश्यक सेवा की आपूर्ति करने में बाधा बन रहा है तब भी सरकार उसे गिरफ्तार करवा सकती है |

इस कानून के तहत केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर किसी भी संदिग्ध नागरिक, व्यक्ति या जमाखोरों, को हिरासत में ले सकती है. यह क़ानून 23 सितंबर 1980 को उस समय की इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लागू किया गया था जो की बहुत ही शक्तिशाली कानून है |

रासुका NSA के तहत किन स्थितियों में गिरफ्तारी की जा सकती है? -: 

रासुका या एनएसए के तहत किसी भी संदिग्ध नागरिक, या व्यक्ति जो देश की सुरक्षा में बाधा बन रहा है ऐसे व्यक्ति या नागरिक को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है | अगर राज्य सरकार की बात करें तो राज्य सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के बाद यह सूचित करने की आवश्यकता होती है की रासुका के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है |

हिरासत में लिए गए व्यक्ति पर बिना आरोप तय किए उसे 10 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. हिरासत में लिया गया व्यक्ति सिर्फ हाई कोर्ट के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है. लेकिन मुकदमें के दौरान रासुका लगे व्यक्ति को वकील की अनुमति नही मिलती.

रासुका  National Security Act – 1980 के तहत कितने महीनो की जेल हो सकती है ? -: 

रासुका National Security Act – 1980 के अंतर्गत न्युनतम तीन महीने से लेकर अधिकतम 1 साल के लिए हिरासत में रखा जा सकता है | रासुका के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बने व्यक्ति को preventive detention एहतियातन हिरासत में रखने का प्रावधान है.

इस कानून के तहत व्यक्ति को पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जाता है | आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी की अवधि को 3 – 3 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है | इसमें यह भी जान लेना आवश्यक है की जिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी की जाती है उसे गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार को सूचित करके यह कारण बताना पड़ता है की आखिर किस आधार पर गिरफ्तारी की गयी है |

अगर राज्य सरकार मंजूरी देती है तो इसे सात दिनों के अन्दर केंद्र सरकार को भेजना होता है |  इसमें कुछ जरूरी बातों का जिक्र करना आवश्यक होता है की किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया और राज्य सरकार का इस पर क्या विचार है और यह आदेश क्यों जरूरी है |  

गिरफ्तारी की अधिकतम अवधि -: अगर, गिरफ्तारी के पर्याप्त कारण साबित हो जाते है तो व्यक्ति को गिरफ्तारी की अवधि से एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है | और इस स्थिति में समय अवधि पूरा होने से पहले न तो सजा समाप्त की जा सकती है और ना ही उसमे फेरबदल किया जा सकता है. ;/

रासुका गिरफ्तारी आदेश का क्रियान्वन -:

CCP ( Code Of Criminal Procedure ) – 173 के तहत जिस व्यक्ति के खिलाफ आदेश जारी किया जाता है, उसकी गिरफ्तारी सम्पूर्ण भारत में कही भी हो सकती है इसमें किसी प्रकार की बाध्यता नही है |

फरार होने की स्थिति में शक्तियाँ -: 

अगर व्यक्ति फरार हो तब इस स्थिति में सरकार या अधिकारी, निम्न शक्तियों का उपयोग कर सकतें है.

  1. वह व्यक्ति के निवास क्षेत्र के मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट को लिखित रूप से रिपोर्ट दे सकता है |
  2. अधिसूचना जारी कर व्यक्ति को तय समय सीमा के अन्दर बताई गयी जगह पर उपस्थित करने के लिए कह सकता है |
  3. अगर, वह व्यक्ति उपरोक्त अधिसूचना का पालन नही करता है तो उसकी सजा एक साल और जुर्माना, या दोनों बढाए जा सकतें है.

रासुका राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में विदेशियों की गिरफ्तारी -: 

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून National Security Act – 1980 के अनुसार यदि सरकार को ये लगे की कोई व्यक्ति अनावश्यक रूप से देश में रह रहा है, और किसी प्रकार से देश की सुरक्षा में बाधक बनता है तब उस व्यक्ति को सरकार गिरफ्तार करवा सकती है | यह कानून सरकार को संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की शक्ति देता है |

रासुका राष्ट्रीय सुरक्षा कानून सलाहकार समिति का महत्व -: 

  1. इस क़ानून के तहत गिरफ्तार किसी व्यक्ति को तीन सप्ताह के अन्दर सलाहकार समिति के सामने उपस्थित करना आनिवार्य होता है. साथ ही सरकार या गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को यह भी बताना पड़ता है की उसे क्यों गिरफ्तार किया गया |
  2. सलाहकार समिति उपलब्ध कार्य गए तथ्यों के आधार पर विचार करता है या आवश्यकता पड़ने पर वह नए तथ्य पेश करने के लिए कह सकता है | सुनवाई के बाद समिति को सात सप्ताह के भीतर सरकार के समक्ष आवश्यक रूप से रिपोर्ट प्रस्तुतु करना होता है |
  3. सलाहकार बोर्ड को अपनी रिपोर्ट में साफ़-साफ यह लिखना होता है की गिरफ्तारी के जो कारण बताएं गए है वो पर्याप्त है या नही |
  4. अगर सलाहकार समिति के सदस्यों के बीच किसी प्रकार का मतभेद है तो बहुलता के आधार पर निर्णय माना जाता है |
  5. सलाहकार बोर्ड से जुड़े किसी मामले में गिरफ्तार व्यक्ति की और से कोई वकील उसका पक्ष नही रख सकता | यहाँ यह भी जनाना आवश्यक है की सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट गोपनीय रखने का प्रावधान है |

रासुका राष्ट्रीय सुरक्षा कानून सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर कार्यवाई -: 

  1. अगर सलाहकार बोर्ड व्यक्ति की गिरफ्तारी के कारणों को सही मानता है तो सरकार उसकी गिरफ्तारी को उपयुक्त समय, जितना वह पर्याप्त समझती है, तक बढ़ा सकती है |
  2. अगर समिति गिरफ्तारी के कारणों को पर्याप्त नही मानती है तो गिरफ्तारी का आदेश रद्द हो जाता है पर व्यक्ति को रिहा किया जाता है |

इस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून National Security Act – 1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति प्रदान करने से सम्बंधित एक कानून है, जो केंद्र और राज्य सरकार को गिरफ्तारी का आदेश देता है यह बेहद ही शक्तिशाली क़ानून है |

What is NSA National Security Act In Hindi

Source – Dhyeya IAS

दोस्तों इस पोस्ट में हमने National Security Act In Hindi के बारें में जाना जो देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति प्रदान करने से सम्बंधित कानून है. तो कैसी लगी हमारी यह पोस्ट हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं और हमारे फेसबुक पेज को जरूर लाइक करें.

Leave a Comment